सुप्रभात!
परम आदरणीय प्राचार्य महोदय, शैक्षणिक प्रधान महोदय, गुरूजन एवं साथियों
मैं _______ कक्षा 9 वीं की छात्रा, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में -" राष्ट्र उत्थान में महिलाओं के योगदान" विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने जा रही हूं।
श्रोताओं,
सर्वप्रथम आप सबको अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को पूरी दुनिया में मनाया जाता है ।
“वह स्त्री है - कुछ भी कर सकती है” यह किसी फिल्म का डायलॉग भर नहीं है, वरन् राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के अविश्वसनीय योगदान पर मुहर लगाता हुआ- एक अकाट्य कथन है।
आपने यह कहावत तो सुनी हीं होगी - "Behind every successful man there is a woman”। अब आप यह भी लिख लें - “Behind Every great nation there is a woman.” यह कहावत महिलाओं के संदर्भ में वाकई चरितार्थ होती है। जब भी हम राष्ट्र की बात करते हैं, समाज व परिवार का जिक्र करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। हर समाज व परिवार के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अहम होती है। यदि एक मां अपने बच्चों में उच्च संस्कार का बीजारोपण करती है, उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाती है; निहायत हीं इससे उच्च स्तर के समाज का निर्माण होता है; एक बेहतर समाज हीं बेहतर राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। मां के रूप में किसी महिला का योगदान परिवार, समाज व राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय है। यूं हीं नहीं कहा गया है - “न मातु: परदैवतम्”। अर्थात ‘ मां से बढ़कर कोई देव नहीं है।’
श्रोताओं,
चिरकाल से हीं मानव सभ्यता के उत्थान में महिलाओं की भूमिका रही हैं। कृषि मानव सभ्यता की एक बड़ी ख़ोज मानी जाती है, और ऐसा माना जाता है कि वह महिला थी जिसने पहली बार इस का अवलोकन किया था। जब हम भारतीय सभ्यता की बात करते हैं तो पूर्व वैदिक काल महिलाओ के लिए स्वर्णिम काल कहा जाता है। ऋग्वेद में ब्रम्हज्ञानी पुरूषों के साथ-साथ ब्रम्हवादिनी महिलाओं का भी नाम आता है। इनमें विश्ववारा, लोपा, मुद्रा, घोषा, इन्द्राणी, देवयानी आदि प्रमुख महिलाएं हैं। गार्गी वाचकन्वी भारतीय दार्शनिक जो महर्षि याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ करती है। ऐसी हीं कई विदूषी महिलाओं का जिक्र मिलता है।
स्त्रियों की शिक्षा की वकालत करते हुए भारत में पहली बालिका विद्यालय खोलने वाली सावित्रीबाई फूले, अंग्रेज़ी सत्ता से दो दो हाथ करने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, एनी बेसेंट, विजयलक्ष्मी पंडित, कमला नेहरू, सुचेता कृपलानी, बिछेन्द्री पाल, संतोष यादव, कल्पना चावला, इंदिरा गांधी जैसी कई महिलाओं का योगदान राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय रहा है।
श्रोताओं,
ऐसी कई भ्रांतियां हैं जिसकी चर्चा अक़्सर लोग करते हैं और जिसे हम सही मानने भी लगते हैं - क्या वाकई वे सही होते हैं भी या नहीं? ऐसी हीं भ्रांतियों में से एक है कि महाभारत, द्रोपदी की वजह से हुई थी? कई लोग अभी भी इसे सच मान रहे होंगे। फिर मेरा सवाल यह है कि क्या दुर्योधन के साथ जुआ द्रोपदी खेली थी?
मुंशी प्रेमचंद कहते हैं - “ कोई अन्याय केवल इसलिए मान्य नहीं हो सकता कि लोग उसे परंपरा से सहते आए हैं।” अन्याय तो अन्याय है - किसी भी स्थिति में यह स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। महिलाओं के प्रति अन्याय का एक विस्तृत इतिहास रहा है। कई कुप्रथाएं समय के साथ दम तोड़ चुकी हैं। सती प्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा इनमें से कुछ प्रमुख प्रथाएं हैं। एक लंबा समय लगा है यह स्वीकारने में कि महिलाओं के लिए शिक्षा कितनी जरूरी है। महिलाओं के लिए परिस्थितियां पहले से बेहतर तो हुईं हैं परंतु अभी भी इस क्षेत्र में काफ़ी सुधार की जरूरत है। World Economic Forum द्वारा जारी किए गए Gender Gap Index 2023 में भारत 146 देशों में से 127वें स्थान पर है, जो चार प्रमुख क्षेत्रों: स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीति में महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर को मापता है। इस अंतर को आप अपने विद्यालय के किसी भी कक्षा का अवलोकन कर के समझ सकते हैं। ऐसा क्यों है कि 60 विद्यार्थियों की संख्या वाली 9 वीं कक्षा में मात्र 12 छात्राएं हैं? निश्चय हीं इसके पीछे ऐसी सोच हैं जो अपने हीं संतान के प्रति भेदभाव करने के लिए माता-पिता को प्रेरित करती है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में सफल हो रहीं हैं। चंद्रयान मिशन से मंगलयान मिशन तक, सीमा पर, जल -थल - नभ हर जगह महिलाएं कमान संभाल रहीं हैं। इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि - इक्कीसवीं शताब्दी महिलाओं की शताब्दी होगी।
अंत में मैं इस कविता के साथ अपनी वाणी को विराम देना चाहूंगी..
रसोई की आग में
राख हुए
अरसों से
उनके सपने
उस घर की चौखट
लांघ आयी हैं - बेटियां
ब्याह सूत्र से
बोझ वत
उतारी जाती रही जो
बोझ को दायित्व समझ
परिवार संभालती हैं- बेटियां
दहेज़ का दंस
सहती रहीं
जलती रहीं जो
आत्मनिर्भर हो रहीं हैं- बेटियां
देखो-देखो
तंग सोच से जकड़ी
जंजीरें तोड़ चुकीं अब
आसमां में पंछीवत
उड़ान भरती हैं- बेटियां
जय हिंद। आपका दिन मंगलमय हो!
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