ना संघर्ष न तकलीफ़ें - फिर क्या है मजा जीने में
अरे तूफान भी थम जाएगा -जब लक्ष्य रहेगा सीने में
सुप्रभात
परम आदरणीय प्राचार्य महोदय,शैक्षणिक प्रधान महोदय, गुरूजन एवं साथियों; मैं __________कक्षा आठवीं ए की छात्रा आज की प्रातः कालीन सभा में “विद्यार्थी -लक्ष्य -आत्मविश्वास -सफलता” विषय पर दो शब्द कहने जा रही हूं।
“उत्तिष्ठत, जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत”
स्वामी विवेकानंद द्वारा अपने उपदेशों में प्राय: इस श्लोक का प्रयोग मिलता है जो कठोपनिषद से लिया गया है । जिसका अर्थ है उठो, जागो और अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत ।
अब प्रश्न यह है कि लक्ष्य है क्या हमारा ? हम में से कई बिना लक्ष्य के ही होते हैं बतौर एक विद्यार्थी हमारा लक्ष्य ज्ञान अर्जन है । ज्ञान का अर्थ कतई ‘सूचना मात्र’ नहीं है । और ज्ञान का मूल्यांकन मात्र ‘स्कूली परीक्षा’ से नहीं की जा सकती। स्वच्छता विषय पर सार-गर्भित निबंध लिखकर पांच में पांच अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी यदि अपने क्लास रूम की सफाई नहीं रख पाते। बस से घर लौटते हुए बिस्किट व चाॅकलेट के रैपर बस की खिड़कियों से बाहर फेंकते हैं अपने से बड़ों व छोटों से कैसा व्यवहार हो अगर यह नहीं समझ पा रहे हों तो निहायत ही ज्ञान का अभाव है।
साथियों
हमारे जीवन का मूल उद्देश्य एक बेहतर इंसान बनना होना चाहिए जो व्यक्तिगत उत्थान के साथ-साथ परिवार, कुल, समाज व राष्ट्र के उत्थान में सहायक हो, वर्तमान का कुशल नेतृत्वकर्ता हो, भविष्य का मार्गदर्शक हो।
बतौर एक विद्यार्थी सैद्धांतिक शिक्षा -आप इसे किताबी ज्ञान कह सकते हैं प्राप्त करने के साथ-साथ व्यवहारिक रूप से कुशल होना भी हमारा उद्देश्य होना चाहिए।
साथियों,
गीता में कहा गया है- कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन।
अर्थात कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है फल की चिंता मत करो।
जिसे कवि हरिवंश राय बच्चन ने यूं कहा है-
“ जब नाव जल में छोड़ दी- तूफान में ही मोड़ दी
दे दी चुनौती सिंधु को -फिर धार क्या मॅझधार क्या?”
जब हमने अपना लक्ष्य तय कर ही लिया है तो अपने असीम संभावनाओं के साथ अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अभीष्ट प्रयास हमें करना ही होगा।
बतौर विद्यार्थी हमारी सफलता में हमारे स्वाध्याय का अत्यधिक महत्व है । इसके अतिरिक्त आत्मविश्वास हमें सफल होने में बेहद मददगार साबित होता है जब हम आत्मविश्वास की बात करते हैं तो इसका अर्थ होता है- एक सकारात्मक गुण जो हमें खुद पर और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने में मदद करता है।
साथियों,
एक आत्मविश्वासी विद्यार्थी परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी करेगा यह जानते हुए कि उसने पाठ्यक्रम का भली-भांति अध्ययन किया है और प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं।
एक अति आत्मविश्वासी विद्यार्थी यह सोचकर ज्यादा पढ़ाई नहीं करेगा कि वह पहले से ही सब कुछ जानता है और बिना किसी प्रयास के परीक्षा में सफल हो सकता है ।
एक आत्मविश्वासी विद्यार्थी रचनात्मक आलोचना स्वीकार करेगा और अपनी गलतियों से सीखेगा यह जानकर कि वे अपने प्रदर्शन और कौशल में सुधार कर सकते हैं।
वहीं एक अति आत्मविश्वासी व्यक्ति किसी भी आलोचना को अस्वीकार कर देगा और अपनी असफलताओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराएगा यह सोचकर कि वह हमेशा सही और परिपूर्ण होते हैं ।
अंत में संस्कृत के सूत्र वाक्य से अपनी वाणी को विराम देना चाहूंगी
“सर्वे सफला भवंतु” - सभी सफल हों।
जय हिंद।
Comments
Post a Comment