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विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस - भाषण

सुप्रभात,
परम आदरणीय प्राचार्य महोदय, शैक्षणिक प्रधान महोदय, श्रद्धेय गुरूजन एवं प्यारे साथियों!
सर्वप्रथम विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। मैं ________ वर्ग _________ की छात्रा विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में ‘ उपभोक्ता जागरूकता ‘ विषय पर अपने विचार व्यक्त करना चाहती हूं। आप सबों के लिए एक रोचक प्रश्न है - आप स्वयं से पूछे -”मैं कौन हूं”। आपके कई उत्तर हो सकते हैं। व्यक्ति जो करता है उससे हीं परिभाषित भी होता है। जैसे - विद्या अर्जन करने वाले -विद्यार्थी कहलाते हैं, शिक्षा प्रदान करने वाले- शिक्षक, मरीजों का उपचार करने वाले -चिकित्सक आदि आदि। परंतु इस अर्थ युग में हम सब की एक और परिभाषा है - हम सभी उपभोक्ता हैं। उपभोक्तृ एव उपभोक्ता अर्थात जो उपभोग करे वही उपभोक्ता है। हम हर दिन किसी न किसी वस्तु या सेवा का उपभोग कर रहें हैं। हम इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं। शिक्षा सेवा है। हम सभी विद्यार्थी उपभोक्ता हैं। बतौर एक उपभोक्ता हमें अपने अधिकार के बारे में पता रहना चाहिए। एक ऐसे युग में हम जी रहे हैं जहां ज्यादातर लोग अनैतिक हो चुके हैं। किसी भी तरीके से अधिक से अधिक लाभ कमाना मूल उद्देश्य रह गया है ।और ऐसे समय में हमें और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। उपभोक्ता अधिकार के सरंक्षण से संबंधित नियम कानून भी हैं। 1985 में भारत में “ उपभोक्ता अधिकार संरक्षण अधिनियम” लाया गया। परंतु हम या तो इससे बिल्कुल हीं अनभिज्ञ हैं या फिर नज़र अंदाज़ करने की आदत सी हो गई है। 
श्रोताओं,
जब भी हम कोई वस्तु बाज़ार से खरीदते हैं - क्या हम उस पर अंकित “MRP” , Manufacturing Date अथवा Expiry Date देखते हैं? अगर हम ऐसा करते हैं तो निश्चय हीं बतौर उपभोक्ता - जागरुक कहलाएंगे। और यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आज से करिए। कोई भी दुकानदार किसी भी स्थिति में “ M.R.P “ से अधिक कीमत पर वस्तु नहीं बेच सकता है। Expired वस्तुएं नहीं बेच सकता। अगर वह ऐसा करता है तो वह अपराधी है। इसके अपराध के लिए दंड का प्रावधान भी है। अगर दुकानदार ऐसा पहली बार करता है तो ₹25000 से एक लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है साथ हीं जेल भी। दूसरी बार करने पर 50,000 से 2.5 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है और जेल भी। इसके लिए हमें उस अनैतिक दुकानदार/ संस्थान के खिलाफ कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1800114000 या उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट consumerhelpline.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी होगी। 
Development Economist, प्रोफेसर ज्यां द्रेज अपनी किताब An Uncertain Glory: India and Its Contradictions में लिखते हैं - भारत में भ्रष्टाचार की मुख्य वजह - “सूचना विषमता” है अर्थात एक पक्ष के पास दूसरे पक्ष की तुलना में अधिक जानकारी का होना।
श्रोताओं, आज की सूचना क्रांति के युग में सूचनाओं के अंबार से, जरूरी सूचना का हम तक पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। हमारे पढ़ें - लिखे होने का क्या औचित्य यदि हम अपने अधिकार के बारे में भी न जान पाएं या कि जानकर भी अनजान रहें। शोषित रहे या हर अपराध पर मौन रहें। शिक्षा जरूरी है और उससे भी अधिक जरूरी है - हमारा जागरूक होना। 
अंत में,
जबतक हम जगे हैं
तभी तक हमारा वज़ूद है
हमारे सोए रहने का अर्थ है
चिरकाल का अंधकार
धन्यवाद! आपका दिन शुभ हो! जय हिंद!



Written by Roshan Prabha 

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